प्रश्नोत्तर P26-0088 · भाग 26
गुरु जी, बात समझ में तो आ गई, फिर भी मुझे लगता है कि आप इससे भी बेहतर तरीके से, और डिटेल में समझा सकते हैं — ज्ञान तो ऐसी चीज है कि जितना मिले ग्रहण कर लो?
जब दो रोटी में पेट भर गया और कह रहे हो इससे भी अच्छी बनाओ — तीसरी खाओगे तो उल्टी हो जाएगी, और जितना खाया वह भी निकल जाएगा। अगर समझ में आ गया तो उसी समय हां कह दो, उससे आगे मत जाओ, नहीं तो जो समझ में आया वह भी उलट दोगे। एक बार में समझ में आ गया और कह रहे हो और समझाओ — यह ज्ञान नहीं, मूर्खता है। एक आदमी ने तुम्हें रास्ता बता दिया, पता समझ में आ गया, तो दोबारा पूछने की कोई आवश्यकता नहीं; उसे धन्यवाद देकर आगे बढ़ो। अगर हमने प्रश्न रखा और उत्तर समझ में आ गया, तो वहीं बात खत्म कर दें; बात खींचने का कोई मतलब नहीं। और सामने वाले की स्थिति-परिस्थिति भी देखिए — एक व्यक्ति बीमार होकर भी घंटों से आपके लिए बैठा है, और आप कह रहे हो जरा और बेहतर बताइए। मानव की तरह जियो, अपने अंदर मानवता लाओ। बेहतर-बेहतर में सब चला जाएगा, वहीं के वहीं रह जाओगे।
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वीडियो: सत्संग में बैठते समय अपने शरीर को कैसे नियंत्रित करें ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14