आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0087 · भाग 26

गुरु जी, मैं अपने पिताजी को कोई बात समझाना चाहता हूं, लेकिन मन में यह है कि बात रखूंगा तो वे नाराज हो जाएंगे। क्या करूं?

वही बात — नाराजगी उनकी मजबूती बन गई, तुम्हारी कमजोरी। कहानी तो सुना ही सकते हो — बोल दो कि हमने एक कहानी में पढ़ा, एक पिता था, एक बेटा था, और घुमा-फिराकर अपनी बात रख दो; फिर पूछो कि इसमें कौन सही है, कौन गलत। वे अपने आप समझ जाएंगे। अपनी बात किसी तरीके से आप रख सकते हो, लेकिन कब? जब अहम भाव को नहीं उठाना चाहोगे। ज्ञानी बनकर समझाओगे तो बाप कहेगा — बाप को समझदार बनकर मत समझाओ, बेटा बनकर समझाओ। आप कहिए कि पिताजी, हमें यह बात समझ में आई है, ठीक है या नहीं — पूछ के भी तो समझाया जा सकता है। बाप को बेटे की तरह अपनी बात रखो, समझाओ मत; चाहे पास करें, चाहे फेल करें। समझाना है तो तुम्हारे पास बेटे हैं ना, उनको समझाओ।

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वीडियो: सत्संग में बैठते समय अपने शरीर को कैसे नियंत्रित करें ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14