प्रश्नोत्तर P26-0095 · भाग 26
गुरु जी, पहले मैं मांगता था कि भगवान सभी को सुखी करे, सभी को सद्बुद्धि दे। फिर एक दिन बैठे-बैठे सोच आया कि यह तो घूम-फिरकर मैं अपने ही बारे में भला मांग रहा हूं — सब अच्छा हो गया तो घूमकर मेरे घर तक और मुझ तक आएगा। क्या यह सही समझ है?
एकदम। कहीं ना कहीं इच्छा तो है। सब में हम भी तो आते हैं। मानव बहुत चालाक है — जिसके द्वारा पैदा होता है, उसका भी नहीं होता; इतना यह चालाक है। शरीर में आने वाला जीवात्मा इस शरीर में आने के बाद इतना चालाक हो जाता है कि जिसके द्वारा आया, उसका भी नहीं होता; उसको भी उलझाना चाहता है।
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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-31