आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0098 · भाग 26

गुरु जी, मैं प्यासा हूं, लेकिन उसके लिए खुद से भी कुछ कर सकता हूं, खुद सुलझा सकता हूं। फिर भी अपने को पूरा ना देकर मांग करना शुरू कर दूं कि मैं प्यासा हूं — तो?

यह गलत हो जाएगा, यह तो कमजोरी है। उस प्यास बुझाने से आपका अहंकार खड़ा हो जाएगा, समर्पण नहीं होगा, आप में मानवता नहीं जगेगी, आप अहंकारी हो जाएंगे और भटक जाएंगे। आप बोझ उठा सकते थे, लेकिन बोल रहे हो मुझसे नहीं उठ रहा, आप उठा दीजिए — बाद में उस आदमी पर हंसोगे कि मैंने बेवकूफ बना लिया। बेवकूफ आपने लोगों को नहीं, अपने आप को बना दिया; आपका आत्मिक स्तर बहुत गिर गया। जरूरत हो तो बोलिए, नहीं तो ना बोलिए। जब उस आदमी ने आपकी मदद की, तो धन, तन या ज्ञान — तीन में से एक ताकत तो लगाई होगी; आपने उसकी ताकत का दुरुपयोग किया है, अब उसकी भरपाई आपको कई गुना करनी पड़ेगी। प्रकृति का नियम है — जितना बीज बोते हो उसका कई गुना मिलता है, चाहे अच्छा हो चाहे बुरा।

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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-31