आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0150 · भाग 26

गुरु जी, भाग्य क्या है? मेहनत तो सभी करते हैं, फिर किसी को 500 मिलता है तो किसी को लाखों — यह भाग्य है या योग्यता?

आपने ऐसा कर्म किया, आपको आगे मिलता है — वही भाग्य है। जैसा करोगे वैसा परिणाम मिलेगा, बस सीधी सी बात है। यहां योग्यता से मिलता है, कृपा से नहीं। यह बल्ब सामने लगा है, यह कम उजाला दे रहा है, वो ज्यादा — क्या इस पे कम कृपा, उस पे ज्यादा कृपा है? इसकी योग्यता ज्यादा है, इसकी कम। इसे यहां लगाओ या वहां, यह अपनी ही औकात दिखाएगा। यहां योग्यता से सब कुछ मिलता है, और जब मिलता है तो उसी को भाग्य कहते हैं। कोई गुरु या भगवान आपके कर्म का आशीर्वाद या श्राप नहीं दे सकता। और जो बेईमानी से, सेटिंग करके पा रहा है, वो बाद में उसकी भरपाई भी करेगा।

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वीडियो: सत्संग में बैठते समय अपने शरीर को कैसे नियंत्रित करें ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14