प्रश्नोत्तर P26-0166 · भाग 26
गुरु जी, एक शिविर में ध्यान में मन अंदर से बाहर खिंचने लगा, कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, तो डर सा लगा और आंखें खोल दीं। आंख बंद करके अंदर जाते समय डर क्यों लगता है, और इस डर को कैसे मिटाया जाए?
वो किसी प्रभाव में हुआ — वो साउंड का, बाहर का प्रभाव था, वो ज्यादा देर टिकता नहीं; ये अपने आप होना चाहिए। डर छूटने का लगता है — बाहर कुछ है ना, छोड़ के जा रहे हो। आप यहां से जा रहे हो और आपकी कोई वस्तु छूट गई, तो उसकी याद आएगी, उसके लिए लौट आओगे; अगर सब कुछ लेके गए हो तो लौटने की जरूरत नहीं। जैसे गांव से सब कुछ — मां-बाप, खेत, परिवार — लेके निकल आए और फोन आए कि गांव डूब गया, तो आप खुश होगे कि बच गया। आप जा तो रहे हो, लेकिन किसी प्रभाव से, और छोड़ के नहीं जा रहे, इसलिए एकदम भय होता है और झट से वापस आ जाते हो। इस डर को मिटाने के लिए सत्संग सुनिए और समझ-समझ के आगे बढ़िए।
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वीडियो: सत्संग में बैठते समय अपने शरीर को कैसे नियंत्रित करें ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14