प्रश्नोत्तर P26-0179 · भाग 26
गुरु जी, विचार कहां से उत्पन्न होते हैं? क्या हम विचारों को कंट्रोल कर सकते हैं, निर्विचार हो सकते हैं?
जब मेरा जन्म हुआ तो मुझे कुछ पता नहीं था; एक बालक को कुछ पता नहीं होता, नाम से लेकर माता-पिता, भाई-बहन सब उसके अंदर बाहर से भरा जाता है। समझने की क्षमता अंदर होती है। हम पांच इंद्रियों द्वारा — रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श से — जानकारी इकट्ठा करते हैं। आंख बंद करके बैठे हो और कोई सड़ी चीज सामने रख दे, तो सूंघते ही विचार उस गंध में चला जाएगा; संगीत बजे तो संगीत में, कांटा चुभे तो दर्द में। कहने का मतलब है — विचार बाहर से आता है, अंदर से पैदा नहीं होता; समझने वाला अंदर है। तो जो बाहर से पैदा हो रहा है, उससे मुक्ति कैसे पाओगे? दुनिया में कहीं भी जाओ, रूप-शब्द-गंध-रस-स्पर्श मिलेंगे। निर्विचार नहीं हो सकते, निर्विकार हो सकते हो। आप उन्हीं विचारों से परेशान रहते हो जिनमें राग-द्वेष है, बाकी हर विचार से परेशानी नहीं। और मन को रोकने की बात — मन "चाहिए" में काम करता है। अगरबत्ती जलेगी तो धुआं निकलेगा; एक तरफ अगरबत्ती जला रहे हो, एक तरफ धुआं रोक रहे हो — कैसे संभव है? बटन एक है, बंद कर दो — वो बटन है "कुछ नहीं चाहिए"। मन आपको इंगित करता है — भूख लगी, प्यास लगी, कौन बताता है? मन आपका सबसे वफादार साथी है; इंगित करना उसका काम है, करना-ना करना आपके ऊपर है। मलाई खुद खाते हो और दोष मन को देते हो। शरीर में जितना भी सिस्टम दिया गया है उसका कुछ काम है — लड़ाई छोड़ दो, मन का सदुपयोग करो, सात्विक तरीके से जीवन जी के सत्कर्म करके आगे बढ़ो।
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वीडियो: विचार कहां से आते हैं क्या हम विचारों को कंट्रोल कर सकते हैं #योगीजी_का_सत्संग #विचार #कंट्रोल · 2024-09-05