आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0180 · भाग 26

गुरु जी, विकारों पर थोड़ा और बताइए — काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह किस तरीके से काम करते हैं?

काम — कोई भी काम करके हम अपने तरीके से परिणाम चाहते हैं, तब हमें तकलीफ होती है; तो काम करो, परिणाम आने दो, इंतजार करो। क्रोध हमें कब आता है? जब हमारे तरीके से सामने वाला कार्य नहीं करता। तो सामने वाले की स्थिति-परिस्थिति जांच लो — हो सकता है वो लंगड़ा हो और आप उसे पूरे पैरों वाले की तरह सोच के डांटने लगे। जांचो कि क्यों नहीं हुआ; जानबूझ के देर किया तो काम दूसरे को दे दो, गलती हो गई तो क्षमा करो, मौका दो — क्रोध नहीं आएगा, क्योंकि आपकी ऊर्जा जांचने में लग गई। मद मतलब अहंकार — रूप का, टैलेंट का, वैभव का। रूप आज नहीं तो कल ढल जाएगा, मिट्टी में मिल जाएगा — उसका क्या अहंकार करना? उसका अच्छे से उपयोग करो, किसी को गिराओ मत। शरीर की ताकत से लोगों को सताने के बजाय लोगों की सुरक्षा में लगा दो, वैभव को सत्कर्म में लगा दो — तब अहंकार नहीं आएगा, क्योंकि आपने उसका सदुपयोग कर दिया। लोभ तब होता है जब आप अपने से ज्यादा किसी अगल-बगल वाले को देखते हो — काश मेरे पास भी होता। देखिए आपको इसकी आवश्यकता है क्या, और आप इस लायक हो क्या — यह जांच लोगे तो लोभ नहीं आएगा। मोह तब होता है जब किसी से हमारे तरीके से कुछ मिलता है; मोह से बंधन, बंधन से आसक्ति हो जाती है, हम उसे छोड़ नहीं पाते। तो लेने का भाव छोड़ दो, देने का भाव अपना लो — तो काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह आप पर काम नहीं करेंगे।

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वीडियो: विचार कहां से आते हैं क्या हम विचारों को कंट्रोल कर सकते हैं #योगीजी_का_सत्संग #विचार #कंट्रोल · 2024-09-05