आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0001 · भाग 27

गुरु जी, हमारे घर में एक चचेरा भाई शराबी है, उसने पूरा घर अस्त-व्यस्त कर रखा है, कितना भी समझाओ नहीं मानता — उसे कैसे सुधारें?

पूरे परिवार में कितने लोग हैं और शराबी कितने? पचास में से तीन शराबी तुम्हें दिख रहे हैं, सैंतालीस अच्छे नहीं दिख रहे। जिसको नहीं सुधरना है उसे कोई नहीं सुधार सकता; जिसको सुधरना है उसे सुधारा जा सकता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी आ जाएं, जिसे नहीं सुधरना वो नहीं सुधरेगा — कृष्ण भगवान ने दुर्योधन के लिए कितना प्रयास किया, उसने कहा मुझे धर्म भी समझ में आता है पर अधर्म करना अच्छा लगता है; सुई की नोक भर जमीन भी देने को तैयार नहीं हुआ। अगर आप बदलाव चाहते हो तो आप किस लायक हो — धन से, तन से, ज्ञान से? सहानुभूति से बीमार ठीक नहीं होता, दवा में सहयोग क्या करोगे वो बताओ। अगर चाहते हो वो परिवार सुखी रहे तो जवाबदारी लो, जैसे अपने बच्चों को पाल रहे हो वैसे उनके बच्चों को भी पालो। और जब तुम खुद एक जर्दा नहीं छोड़ पा रहे हो तो उन्हें बोल भी नहीं सकते — फंसे तुम भी हो, फंसे वो भी हैं। पहले अपनी कमी दूर करो, तब सामने वाले को समझाओगे तो वो मानेगा।

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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14