आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0083 · भाग 27

महाराज जी, एक महीने से सत्संग सुनता हूं, सारी बात समझ में आती है; दर्शन देने की कृपा करें।

दर्शन भी इसलिए करना है कि दर्शन से मुक्त होना है। जब तक दर्शन की इच्छा है तब तक आप रूप में लिप्त हो, और यह रूप नहीं रहेगा; तो दर्शन से भी मुक्त होना है। दर्शन से मुक्त होंगे तभी आप अपने आप में स्थिर हो पाएंगे; जब तक दर्शन की इच्छा है तब तक आप भटकते रहोगे। अभी तक हमने किसका दर्शन किया? जो लोग कामनाओं में थे — हम भी कामनाओं में, वो भी कामनाओं में। अब हमें ऐसे लोगों का दर्शन करना है जिसकी कोई इच्छा नहीं है; जब हम ऐसे लोगों के पास जाएंगे तो हमारा भी भाव उस तरीके से बनने लगेगा। जिसे कुछ नहीं चाहिए ऐसे लोगों का दर्शन करोगे तो एक समय ऐसा आएगा कि आप दर्शन से मुक्त हो जाओगे, और उसी समय आपकी उपलब्धि होगी।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: कुछ नहीं चाहिए मैं कैसे आए ? #livesatsangyogijika #pratyakshjyan #aadhyatmikgyan · 2025-03-12