आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0124 · भाग 27

गुरु जी, मैं कौन हूं? क्या मैं एक व्यक्तित्व हूं जो जन्म से ही बनता जाता है, मृत्यु तक परिवर्तनशील है, और मृत्यु मेरा अंत है, कोई पुनर्जन्म नहीं?

नहीं। तुम्हारा न जन्म है, न मृत्यु। क्योंकि देखिए, आप कहते हो मैं बचपन में भी था, कुमार में भी था, युवा में भी, वृद्ध में भी; पहले मेरा बुरा वक्त था, अब अच्छा वक्त हो गया; पहले मैं नासमझ था — मतलब नासमझ में भी तुम थे, और अब समझ हो गई तो समझ में भी तुम। हर जगह तुम हो; यह ध्यान रखना, "तुम" कभी बदलता नहीं। भूख लगी — तुम, पेट भर गया — तुम; हर जगह तुम ही तुम, यही सत्य है। और इसमें तभी आप स्थिर हो पाएंगे जब आपको कुछ नहीं चाहिए; जब तक कुछ चाहिए, ऐसे ही घूमते रहोगे।

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वीडियो: कुछ नहीं चाहिए मैं कैसे आए ? #livesatsangyogijika #pratyakshjyan #aadhyatmikgyan · 2025-03-12