प्रश्नोत्तर P27-0133 · भाग 27
गुरु जी, मैं एक-दो घंटे साधना करता हूं और दिन भर वही काम करता हूं जो कर रहा था; मेरा जीवन अशांत है — इतने सालों से साधना कर रहा हूं, कुछ हो नहीं रहा है।
एक-दो घंटे साधना करके अपने आप को शांति तक लाना चाहते हो, लेकिन ज्यादा समय तो वहां दे रहे हो; तो ग्रोथ किसका होगा? अशांति का ग्रोथ ज्यादा होगा, शांति का तो कम होगा — इसलिए आप छूट नहीं पा रहे हो। आप जीवन ही साधना बना लो; ऐसा जीवन जियो कि जीवन ही साधना बन जाए, तभी आप आत्मिक कल्याण कर पाओगे। एक-दो घंटे में आत्मिक कल्याण नहीं होगा। आठ घंटे सोए, दो घंटे नहाने-धोने में, तो दस घंटे क्या करोगे? दस घंटे आपने अशांति में दे दिए, दो घंटे ही साधना किया — तो उन्नति कहां होगी? जहां ज्यादा समय दोगे। और प्लस-माइनस के चक्कर में मत पड़ो — इतना पाप कर दो, इतना पुण्य करके इसे खत्म करो — नहीं; पाप का परिणाम पाप में भोगना पड़ेगा, पुण्य का परिणाम पुण्य में।
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वीडियो: समाज को मेरा एक संदेश है पंछियों को भोजन चारा दाना खिलाए / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-03