प्रश्नोत्तर P27-0007 · भाग 27
गुरु जी, जब अर्जुन को आत्मज्ञान हो गया था तो वे फिर से माया में फंसकर पुत्र-मोह में व्याकुल कैसे हो गए?
माया में फंसे नहीं — यही तो बात है। जब एक बार आत्मज्ञान हो जाता है तो व्यक्ति माया में फंसता नहीं है। पुत्र-मोह में आकर उन्होंने कृष्ण को बोला था, पर ग्रसित नहीं हुए थे; कृष्ण भगवान ने उन्हें पुत्र-मोह से हटाया। देखिए, पिता का आखिरी समय था तो बुद्ध मिलने गए थे ना — कहीं न कहीं पिता से अपनापन था। आदि गुरु शंकराचार्य अपनी मां के लिए गए कि नहीं? तो अपनापन रहता है; कभी-कभी आ जाता है, लेकिन वो टिकता नहीं है, क्योंकि आत्मज्ञान के सामने वो टिकेगा नहीं।
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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14