आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0040 · भाग 27

गुरु जी, हम शुरू से परमात्मा के लिए भटकते हैं, और अगर किसी इंसान से हमें प्रेम हो जाए तो क्या उसकी वजह परमात्मा का प्रेम ही है, जिसे हम अनजाने में कुछ और समझ लेते हैं?

प्रेम की परिभाषा क्या है? कुछ नहीं चाहिए — प्रेम है। तो क्या कुछ नहीं चाहिए में किसी से प्रेम हुआ? अगर सामने वाले से कुछ नहीं चाहिए और लग रहा है प्रेम है, तब तो प्रेम है। प्रेम है बिना इच्छा-अपेक्षा के। जो दुकान से जर्दा लिए, खाए — प्रेम था; और थूक दिए। फिर उठा के खाओ तो प्रेम है! जरूरत पूरी हो गई तो थूक दिया। ऐसे ही होता है; किसी से प्रेम नहीं है भैया, सब अपने मतलब में जी रहे हैं। मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं।

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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14