प्रश्नोत्तर P27-0041 · भाग 27
गुरु जी, सरलता पर प्रकाश डालिए — सरल होना ही कठिन लग रहा है।
सरल होना तो एकदम सरल है। जब अपने तरीके से नहीं चाहिए तो आप सरल हो; अपने तरीके से चाहिए तो आप जटिल हो। बस कितनी सीधी बात है। मुश्किल तो आपने बना दिया है — अपने तरीके से चाहिए में। जैसा आप हो वैसा आपको मिल रहा है, स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हो? यहां तो किसी का तरीका ही नहीं चलता, किसी का बैकग्राउंड काम नहीं करता — जो सही है वो चलेगा। प्रकृति का नियम भी यही है, भगवान का नियम भी वही है: जो सही है वही चलेगा, तेरा-मेरा नहीं चलेगा।
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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14