प्रश्नोत्तर P27-0052 · भाग 27
गुरु जी, आप कीचड़ में कमल की तरह हो और मैं कीचड़ में पड़ा हुआ कीड़ा — आपकी कमल-डंडी को छूना चाहता हूं, कैसे छुऊं?
देखिए, एक से सब है, तो आप आराम से अपने आप को निकाल सकते हो। आप शुद्ध थे, शुद्ध हो, शुद्ध रहोगे; अशुद्धता आपने धारण की है, तो अशुद्धता को छोड़ दो। बस बात खत्म, इतनी सी बात है।
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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14