आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0053 · भाग 27

गुरु जी, साधारण और असाधारण में क्या अंतर है?

जो साधारण-असाधारण से मुक्त होकर अपने आप को समझे, वह महान है; और जो कुछ पाने में घूम रहा है, वह साधारण-असाधारण में है — मिल गया तो असाधारण, नहीं मिला तो साधारण, ऐसे ही घूम रहा है। साधारण-असाधारण से परे उठो। और मैं आपको इतना बता दूं — जब वाल्मीकि जैसे रत्नाकर डाकू का कल्याण हो सकता है, अंगुलिमाल जैसे का कल्याण हो सकता है, जिन्होंने आदमियों को काटकर उंगलियों की माला पहन रखी थी, तो आपका क्यों नहीं हो सकता? मेरे समझ से इस जन्म में आपने उनसे ज्यादा अपराध नहीं किया है। बस वो जब समझे तो पूरी तरह लग गए — आप भी लग जाओ।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14