प्रश्नोत्तर P27-0187 · भाग 27
गुरुदेव, भगवान कौन है?
"कौन है" से परे है। भग मतलब योनि, और वान मतलब चलाने वाला — योनि मतलब जहां से हमारा जन्म होता है। जो जन्म-मरण से मुक्त हो गया, वह है भगवान; जिसने इच्छा और अपेक्षा से अपने आप को मुक्त करा लिया, वह है भगवान। जो पूरी तरह पवित्र हो गया, उसके मिलने के लायक हो गया — वह है भगवान। इसके बाद परमात्मा अलग है — उसके बाद यात्रा होती है परम शक्ति की; भगवान उसकी यात्रा करता है। वह इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो गया, तो इस जगत से मुक्त हो गया; अब उसकी आगे की यात्रा होगी। बोलने में हम भगवान को ही परमात्मा कह देते हैं — जैसे दुकान पर कहते हैं कपड़ा धोने का साबुन दो, जबकि सही में तो मैल धोने का साबुन चाहिए। गहराई में आओगे तो सब बातें स्पष्ट हो जाएंगी।
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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30