प्रश्नोत्तर P28-0043 · भाग 28
गुरु जी, क्या आपने कुछ निश्चय किया है कि कब तक आप यह (सत्संग का काम) करते रहेंगे?
जब तक इस शरीर में रहना होगा, जब तक शरीर काम करेगा। अपना कल्याण तो पशु भी कर लेता है; अगर हम अकेले उस स्थिति में जाएं तो मेरे जाने का क्या मतलब होगा — अनेकों जाएं। बचपन में मैं स्वर्ग-नर्क के बारे में सुनता था, तो मैंने कहा कि अगर मुझे कुछ मिले तो नर्क मिले, क्योंकि वहां सब दुखी रहेंगे, वहां सेवा करूंगा; स्वर्ग नहीं चाहिए। मैंने दुख का चुनाव किया — दुख नहीं चाहता, लेकिन संसार में जो भी करोगे उसका आखिरी परिणाम दुख है, तो मैंने आखिरी परिणाम को स्वीकार किया, क्योंकि मुझे आखिरी तक पहुंचना है। सुख में कोई और रहेगा, दुख में बस मैं रहूंगा, क्योंकि दुख में और कोई आना नहीं चाहता — इस भाव से मैं जीवन जीता हूं।
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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30