प्रश्नोत्तर P28-0068 · भाग 28
गुरु जी, मन की ना मानकर, इंद्रियों को हर समय ध्यान में रखकर, हर स्थिति-परिस्थिति के अनुसार जो होना चाहिए वैसा करना — क्या यही आत्म-साक्षात्कार और परमानंद है, या कुछ और होता है?
यह आप देखो कि मैं कर क्या रहा हूं। ईमानदारी और सत्कर्म करो — यह आपको परमानंद तक ले जाएगा। अपने को सुधारना ही आध्यात्मिकता है।
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