आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0076 · भाग 28

गुरु जी, जहां मैं हूं, अगर मुझे वहां दुख नहीं है, तो क्या मुझे आत्मज्ञान नहीं होगा — चाहे मैं आत्मज्ञान चाहूं तब भी?

दुख नहीं है तो फिर क्या है? सुख है, तो सुख में भी आत्मज्ञान नहीं होगा, क्योंकि सुख के बाद ही तो दुख आएगा। अगर सुख में जी रहे हो तो दुख भी आएगा, राग में जी रहे हो तो द्वेष भी आएगा, क्योंकि जिसके द्वारा सुख ले रहे हो वो जब छूटेगा तो दुख होगा। हो सकता है आज दुख नहीं है, लेकिन जहां से सुख ले रहे हो, वो दुख ही तो बनने वाला है। तो देखो — आप सुख में हो, इसलिए दुख नहीं है।

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