आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0099 · भाग 28

गुरु जी, "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" वाक्य का सही अर्थ समझाइए।

जो पिंड में है वही ब्रह्मांड में है। कहने का मतलब है — जो भी आपको बाहर समझ में आ रहा है, समझने वाली समझ अंदर है, तभी आप समझ पा रहे हो। तो जो अंदर है वही बाहर है, जो बाहर है वही अंदर है।

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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30