प्रश्नोत्तर P28-0109 · भाग 28
गुरु जी, कण कण में भगवान है — यह बात कहां तक सच है?
कण कण में भगवान होता तो आदमी आगे जाता ही नहीं — एक कण को उठा के, जब तक भगवान प्रत्यक्ष नहीं हो जाता, तब तक रुका रहता। ये बातें हैं; इस जगत से परे परमात्मा है — भगवान बोलो चाहे परमात्मा बोलो। कण कण में होता तो कोई कण हम छोड़ते क्या? पैरों के नीचे हम कण कण को कुचलते चले जाते हैं। जरा बात को समझिए।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31