आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0122 · भाग 28

गुरु जी, मैं अपने अंदर बहुत सारी रोशनी देखता हूं।

ठीक है, दृष्टा भाव रखिए, उसमें लिप्त ना होइएगा — क्योंकि रोशनी अलग है, आप अलग हो; रोशनी देखने वाला अलग, रोशनी अलग। ना तो अंधकार में फंसना है, ना प्रकाश में फंसना है, क्योंकि जो दिख रहा है वो आपसे अलग है। दृष्टा भाव से बस देखना है, करना कुछ नहीं है। अच्छे में गए तो भी राग-द्वेष में फंस गए, बुरे में गए तो भी।

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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31