आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0141 · भाग 28

गुरु जी, मुझे लगता है कि आपके शब्दों में कुछ गर्व है।

हो सकता है, अगर आप समझ रहे हैं तो जरूर हो सकता है, कोई बात नहीं। स्वाभिमान तो है ही है, आत्म सम्मान तो है ही — मैंने अपने जीवन में ऐसा काम किया कि मैं अपना सम्मान खुद करता हूं। जो व्यक्ति समाज के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दे, तन-मन-धन से, अपनी आत्मरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए — लोग अपनी कामनाओं के लिए एक दूसरे को लूट रहे हैं और एक व्यक्ति अपने आप को लुटा रहा है — क्या उसे अपने आप पर गर्व नहीं होना चाहिए? गर्व वाला काम करके गर्व होना अच्छी बात है; गर्व वाला काम नहीं किया हो तो गर्व होना ठीक नहीं, तब वो अहम भाव में गिरा देता है।

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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31