आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0168 · भाग 28

गुरु जी, आत्मज्ञान हेतु इंद्रिय संयम आवश्यक है — गृहस्थ में ब्रह्मचर्य से कैसे रहें? गृहस्थ में ब्रह्मचर्य का क्या स्वरूप होना चाहिए?

देखिए, ब्रह्मचर्य अगर आपको रखना है तो सर्वप्रथम ईमानदारी — ईमानदारी से कमाया हुआ धन। इसके बाद आंतरिक ईमानदारी, मेहनत, और मेरे कर्म से किसी को तकलीफ ना हो। और जरूरतमंदों की सेवा, जिस लायक आप हैं — धन से, तन से, ज्ञान से; आपके दरवाजे से कोई भूखा-प्यासा ना जाए। काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह — इनका सही जगह सही उपयोग करना। इस तरीके से जीवन में आगे बढ़ो। ब्रह्मचर्य का मतलब यह नहीं कि बस काम भाव से अपने आप को रोक लेना; बेईमानी से कर रहे हैं तो ऐसे ब्रह्मचर्य का कोई मतलब नहीं — उस ऊर्जा का सदुपयोग नहीं, दुरुपयोग हो जाएगा। ऊर्जा का सदुपयोग तब कर पाएंगे जब आप ईमानदारी से जीवन जिएं — ईमानदारी ही तपस्या है।

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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31