प्रश्नोत्तर P28-0184 · भाग 28
गुरु जी, प्रकृति पुरुष है और नारी — कृपया एक बार और समझाइए।
प्रकृति पुरुष भी है और प्रकृति नारी भी है। जब आपको चाहिए, तब प्रकृति पुरुष है और आप नारी हो; और जब आपको कुछ नहीं चाहिए, तो प्रकृति नारी है और आप ना पुरुष हो ना नारी। जब आपको चाहिए, तो चाहिए में आप अपने आप को पालते हो। पालता कौन है? नारी। देने वाला पुरुष। तो हम अपने आप को पाल रहे हैं, तो हम नारी हो गए, और जिससे ले रहे हैं वो पुरुष हो गया। और जब तुम्हें कुछ नहीं चाहिए, तो पालने से मुक्त हो गए; अब तुम ना पुरुष रहे ना नारी। अब तुम्हें पाल कौन रहा है? प्रकृति। अब प्रकृति आपके लिए नारी हो गई, मां हो गई — फिर वो अपने तरीके से पालेगी, बस उसके ऊपर छोड़ देना है। तो हमारी स्थिति में प्रकृति पुरुष भी है, नारी भी है; जैसी स्थिति बदलेगी वैसे प्रकृति बदल जाती है।
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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30