प्रश्नोत्तर P26-0195 · भाग 26
गुरु जी, साधना में जब धीरे-धीरे सब ब्लैंक होने लगता है, अकेलापन लगता है, लगता है सब छोड़कर जा रहे हैं — तब भी असुरक्षा और भय की स्थिति आती है, इसका क्या करें?
भय है, क्योंकि कोई हाथ पकड़ने वाला नहीं है और जो थे वो छोड़कर जा रहे हैं। हर व्यक्ति एक सहारा ढूंढता है, सबको एक सहारा चाहिए। और कोई न कोई मिल जाता है — यह प्रकृति का खेल है। मैंने अभी तक इस प्रकृति को कल्पवृक्ष की तरह समझा: जैसे ही आपको सब छोड़ते हैं, कोई न कोई सहारा आकर खड़ा हो जाता है कि मैं हूं — और जितने छोड़कर गए थे उनसे अच्छा। यह मैंने देखा, महसूस किया, क्योंकि मुझे अकेले घूमते 13 साल के ऊपर हो गए। जैसी आपकी प्रवृत्ति है वैसे लोग आपको मिल ही जाते हैं। तब हम आंतरिक भाव से कहते हैं कि बहुत अच्छा हुआ लोगों ने मुझे छोड़ दिया, नहीं तो हम यहां तक कैसे आते; अगर वो पकड़े रहते तो हमारा शोषण ही करते। कबीर का भजन है — "भला हुआ मेरी गगरी फूटी।"
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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14