प्रश्नोत्तर P26-0196 · भाग 26
गुरु जी, जब यह धारणा बनाते हैं कि सब कुछ एक ही है, सब प्रतिबिंब है, सब ऑटोमेटिक हो रहा है — तो फिर भी भय क्यों नहीं जाता?
आपके मानने से एक हो जाएगा? जबरदस्ती समझ रहे हो। अनेक हैं, आप एक क्यों समझ रहे हो? अगर एक ही होता तो भय किससे और किसको? जब एक ही है तो कौन फंसा है, कौन निकाल रहा है, किसके लिए निकाल रहा है? एक से अनेक लोग हैं — एक निकलने के लिए परेशान है, एक निकालने के लिए मार्ग बता रहा है। सब एक जैसे थे, अब एक जैसे नहीं हैं — सब अपनी-अपनी कामनाओं में अलग-अलग हो गए, राग-द्वेष में फंस गए, राजसी-तामसी प्रवृत्ति अपना ली। अब आप थक गए हो और सात्विक तरफ लौटना चाह रहे हो। बातों से बात नहीं बनेगी; वास्तविक प्रवृत्ति पर लौटना पड़ेगा। सात्विक प्रवृत्ति में आप तभी पूरी तरह लौट पाओगे जब ईमानदारी और सत्कर्म होगा — तब आप स्व तक पहुंच जाओगे। राजसी-तामसी में घूमोगे तो संसार में घूमते रहोगे।
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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14