आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0197 · भाग 26

गुरु जी, चौपाई है "मैं अरु मोर तोर तैं माया" — मैं-मेरा और तेरा की वजह से माया फैली; तो क्या मेरा-तेरा करना छोड़ दें?

वो किस स्थिति में लिखा है, वह तो देख लो। एकनाथ जी महाराज को गुस्सा दिलाने के लिए एक आदमी ने कई बार पान खाकर उन पर थूका; वो बार-बार जाकर नहाए और फिर बोले — तुम्हारी वजह से मैंने इतनी बार स्नान किया, तुम्हें भी पुण्य मिलेगा। फिर एक आदमी ने उनकी पत्नी को पीछे से पकड़ लिया, तो उन्होंने कहा — बालक को संभालना, कहीं चोट न लग जाए। आप उस जगह पर क्या करते? इस समय की प्रवृत्ति के अनुसार तो बर्दाश्त नहीं कर पाते। कहने का मतलब — ये सब बातें उन्होंने उपलब्धि के बाद लिखी हैं, ये उपलब्धि के बाद काम आएंगी। पहले उस उपलब्धि तक पहुंचो; अपनी औकात में रहकर अपनी औकात को कैसे उठा सकते हो, उसके लिए काम करो। लोग उपलब्धि के बाद का श्लोक पकड़ रहे हैं। यह चौपाई राम जी लक्ष्मण को समझा रहे हैं — इंद्रियों से, मन सहित जहां तक आप जाते हो, वह माया का ही दायरा है। इसलिए बातों में मत फंसो, काम करो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14