आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0199 · भाग 26

गुरु जी, कभी-कभी बेईमानी समझ में भी नहीं आती, अनजाने में हो जाती है — उसका क्या?

अनजाने में जब आप चलते हो तो हजारों-लाखों जीव मर जाते हैं, उसका पाप नहीं लगता। बेईमानी जब भी होती है, प्लानिंग से होती है। अनजाने में गलती होती है, वो माफ की जाती है। अपना भाव यह रहना चाहिए कि मुझे बेईमानी नहीं करनी। सब्जी काटते हुए कभी अपना हाथ कट जाता है — वह गलती है। लेकिन प्लानिंग से की गई गलती, गलती नहीं, अपराध है; सूझबूझ के साथ जब आप करते हो वो अपराध है और उस अपराध का दंड है। मान लीजिए एक पागल किसी को चांटा मार दे और एक समझदार आदमी कॉलर पकड़ ले — सजा समझदार को होगी, क्योंकि पागल को पता ही नहीं कि वह क्यों मार रहा है, पर समझदार को पता है। भाव पवित्र होना चाहिए, निष्कामता से कर्म करते चलना; छल-कपट, बेईमानी, झूठ नहीं होना चाहिए। और इसमें कोई मेहनत भी नहीं करनी — मेहनत तो बेईमानी में सबसे ज्यादा होती है; एक झूठ छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं।

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वीडियो: परिवर्तन से भय क्यों है ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-14