आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0135 · भाग 27

गुरु जी, कभी ना कभी तो हम परमात्मा के पास थे — फिर हमें यह याद क्यों नहीं है?

वहां तो पता ही नहीं चलता है कि कौन था, कौन नहीं था, भीड़ थी या क्या; क्योंकि आप जिस रूप में हैं, उस रूप में हम आपको समझते हैं। यह रूप इस धरती पर पहले नहीं था, बाद में नहीं रहेगा। हमारा-आपका परिचय इस रूप से हो गया है; रूप के पीछे वाले तक हम नहीं पहुंच पा रहे। रूप के पीछे वाले तक तब पहुंचेंगे जब रसपान की इच्छा छूटेगी — वह नहीं छूट पा रही, इसलिए रूप के पीछे वाले को नहीं देख पा रहे। जब तक रसपान की इच्छा है, आप रूप के आगे जा ही नहीं पाओगे। रूप से अगर निकलना है तो रसपान की इच्छा का पूरी तरह त्याग करना पड़ेगा, तभी हो पाएगा। बिना लिप्त हुए आप देख पाओ, तब आप रूप के पीछे जा सकते हो; और रूप के पीछे सत्य है, और सत्य ब्रह्म की यात्रा कराएगा।

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वीडियो: कुछ नहीं चाहिए मैं कैसे आए ? #livesatsangyogijika #pratyakshjyan #aadhyatmikgyan · 2025-03-12