प्रश्नोत्तर P27-0138 · भाग 27
गुरु जी, परमात्मा से कब और कहां जाकर प्रार्थना करें कि प्रभु स्वीकार कर लें?
ईमानदारी, सत्कर्म करते रहो — वह स्वीकार और अस्वीकार से परे है। आप यह मत सोचिए कि आप कुछ बोल रहे हो और वह सुन रहा है या नहीं सुन रहा। आपके बैंक में पैसे नहीं हैं तो एटीएम से कितनी भी प्रार्थना करो, एटीएम पैसे नहीं देगा; अगर आपने बैंक में जाकर डाल दिया, तो एटीएम आपको पैसा दे देगा — एटीएम ने दिया नहीं, आपका था, आपको मिल गया; एटीएम निमित्त है। कहने का मतलब है कि आपको गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं है, मूल आपका कर्म है। प्रार्थना में समय बर्बाद करने से अच्छा है वह समय ईमानदारी से सत्कर्म में लगा दो। अगर प्रार्थना स्वीकार की जाती तो लोग भूखे नहीं होते — एक करोड़पति कहता है मंदिर में मेरी प्रार्थना सुन ली, मेरा टेंडर पास हो गया; और एक व्यक्ति झोपड़पट्टी में भूखा मर रहा है, उसकी क्यों नहीं सुनता? ऐसा सुनने वाला परमात्मा हो सकता है क्या? कमजोर व्यक्ति हमेशा प्रार्थना करता है। विद्यार्थी प्रार्थना करेगा कि मैं पास हो जाऊं — जितना लिखा होगा उतना नंबर आ जाएगा; प्रार्थना करने से अच्छा था मेहनत करता। तो मूल कर्म है। जितना समय हो, ईमानदारी से सेवा में लगा दो, बिना आवरण देखे सत्कर्म — भूखे को भोजन, प्यासे को पानी।
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वीडियो: कुछ नहीं चाहिए मैं कैसे आए ? #livesatsangyogijika #pratyakshjyan #aadhyatmikgyan · 2025-03-12