प्रश्नोत्तर P27-0147 · भाग 27
गुरु जी, क्या 10वीं पास करने के बाद बच्चे को आध्यात्मिक शिक्षा के लिए आपकी शरण में छोड़ सकती हूं? अगले साल वह ब्रह्मचारी बनना चाहता है।
मैं तो कहूंगा कि अभी उसको पढ़ाइए, उसे ब्रह्मचारी के चक्कर में ना फंसाओ। अभी वह 16-17 साल का बालक है, उसे शिक्षा दीजिए; यह "कुछ नहीं चाहिए" का मार्ग है — उसकी जिंदगी को नरक मत करिए। जब वह उस योग्य हो जाए कि अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, तब इस मार्ग में आए; नहीं तो अगर कुछ चाहिए और इस मार्ग में आ गया, तो जिंदगी नरक हो जाएगी — एक फ्रॉड व्यक्ति बन जाएगा। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है: मैं जब निकला, ज्योतिष तो पहले था, फिर तंत्र विद्या से लेकर श्मशान जाना, नदी-नाले, सिद्धि-रिद्धि — जितना अपने से हो सका सबको समझा। इसमें सफल वही होगा जिसे कुछ नहीं चाहिए; जिसे कुछ चाहिए वह भ्रष्ट इंसान बन जाएगा, इंसान के रूप में राक्षस — और उस राक्षस को लोग भगवान समझेंगे। कहा गया है कि महिला लगभग 25 साल में और पुरुष 28 साल बाद अपने फैसले लेने लायक होता है। अभी तो वह 16-17 का है — उसे अच्छी शिक्षा दो, 28 के बाद फैसला ले तो ठीक है। फिर अध्यात्म में आए तो "कुछ नहीं चाहिए" में आए; नहीं तो जहां रहे, कमा-खा के रहे और आध्यात्मिक यात्रा करे। मैं तो नहीं कहूंगा कि आप इधर भेजिए, कभी नहीं — अभी उसकी समझ ही नहीं है। ऐसे अबोध बालकों को भटकाओ मत।
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वीडियो: कुछ नहीं चाहिए मैं कैसे आए ? #livesatsangyogijika #pratyakshjyan #aadhyatmikgyan · 2025-03-12