आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0171 · भाग 27

सद्गुरु, क्या कभी किसी भी समय गुरु का किसी भी तरह का ऋण चुकाना पड़ता है?

नहीं, गुरु का कोई ऋण नहीं होता है, क्योंकि गुरु उस स्थिति पर होता है जहां उसे कुछ भी नहीं चाहिए। ऋण तो उसका होता है जिसे कुछ चाहिए — वह लेनदेन से परे हो जाता है। अगर आप सेवा के भाव से उसे कुछ देना ही चाहते हैं, तो बस अपना आत्मिक कल्याण कर लो, बात खत्म हो गई; क्योंकि आपको जो शब्द दे रहा है, उसके लिए उसका पूरा जीवन लग गया है। और कुछ दोगे तो वह उस तक पहुंच ही नहीं पाएगा, क्योंकि उसे कुछ चाहिए ही नहीं। कुछ नहीं में आ जाओ — बस यही उसको देना है।

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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30