आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0005 · भाग 28

गुरु जी, अगर मैं एक बिजनेसमैन हूं, तो अपने कारोबार को प्रॉफिट के साथ-साथ लोगों के कल्याण के लिए भी कैसे चलाऊं? इसके लिए क्या कदम ले सकते हैं?

अगर उस बिजनेस से समाज का हित हो रहा है, समाज को लाभ हो रहा है, और मैं वही दे रहा हूं जो मैं बोल रहा हूं — वही प्रोडक्ट तैयार कर रहा हूं जो लोगों को बता रहा हूं — तब आप ईमानदार बिजनेस में हो। और पता चला कि बाहर कुछ और, पैकिंग में कुछ और, मिलावट है, तो फिर आपको परिणाम भोगना पड़ेगा। देखिए कि समाज को उसकी जरूरत है या नहीं, और उसमें समाज का हित है या नहीं — मेरा भी, समाज का भी, परिवार का भी। जब आप व्यापार करते हो तो आप भी वहां खड़े हो, परिवार भी और समाज भी — तीनों का देखना है। सिर्फ समाज का देखोगे तो आप ही बर्बाद हो जाओगे, फिर आगे कैसे करोगे? तो सर्वप्रथम अपने आप को ताकतवर बना के रखो — धन, तन और ज्ञान, यह बल आपके पास होना चाहिए, तभी कर पाओगे; नहीं तो बस बातें रह जाएंगी। कोई गिर गया तो वहां पैसा काम नहीं करेगा, उसे गोद में उठाना होगा; किसी को भूख लगी तो वहां सत्संग काम नहीं करेगा — पहले रोटी दो, बाद में सत्संग सुनाओ। धर्म तभी समझ में आता है जब पेट में रोटी होती है।

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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30