आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0008 · भाग 28

गुरु जी, "ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी" — इसकी व्याख्या करेंगे?

ताड़न का मतलब पीटना नहीं, ताड़न मतलब सुधारना। शूद्र कौन है? जिसके अंदर छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड है, वह शूद्र। गंवार कौन है? जो सत्कर्म और दुष्कर्म को समझने के बाद भी, परिणाम का पता होते हुए भी दुष्कर्म करता है। ढोल शरीर को बोला गया है — ढोल को जितना सही तरीके से बजाओगे, उतना उसमें से ताल, लय, संगीत निकलता है, लेकिन बजाना आना चाहिए। पशु — ऐसे लोगों का जीवन, जो मानव तन पाने के बाद भी पशुओं की तरह जी रहे हैं। नारी — जिसे चाहिए वह नारी है, देने वाला पुरुष है; प्रकृति पुरुष है और जिसे चाहिए वह नारी। ये सब ताड़न के अधिकारी हैं — अगर ऐसा अवगुण आपके अंदर है तो अपने आप को सुधारिए। जब तक आपको चाहिए, तब तक प्रकृति पुरुष है; जब आपको कुछ नहीं चाहिए, तब वही प्रकृति मां बन जाती है।

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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30