आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0007 · भाग 28

गुरु जी, उस प्रेम की व्याख्या करिए जहां न रूप हो, न स्पर्श, न रस, न लोभ, न मोह, न गंध, न छल, न कपट — फिर भी उस प्रेम से अलग होने पर हमेशा तड़प बनी रहती है।

जहां कुछ नहीं, वहीं प्रेम। जब कुछ नहीं चाहिए, तब आपमें प्रेम पैदा हो जाएगा — कुछ नहीं चाहिए में प्रेम है। जैसे यहां प्रेम है — न मुझे आपसे कुछ चाहिए, और आप भी कुछ नहीं चाहिए के लिए बात कर रहे हो। यहां लेन-देन नहीं है।

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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30