आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0025 · भाग 28

गुरु जी, बहुत से साधु-महात्मा अच्छी अवस्था में होते हैं, पर समाज में धर्म की देशना देते-देते लोगों से इतना घुल-मिल जाते हैं कि उनकी साधना का स्तर गिर जाता है और वे किसी लोभ या गलत आदत में फंस जाते हैं — ऐसा क्यों होता है?

समाज में आप किस स्थिति पर होकर उतरते हो और क्या करते हो — अगर आप आत्मज्ञान पर होकर उतरे, तब तो आप कभी गिर ही नहीं सकते; और अगर आप लोगों की कामनाएं पूरी कर रहे हो, तब तो गिरे ही गिरे हो। कौन सा ऐसा फील्ड है जिसमें यह सब न हुआ हो? मां-बाप, शिक्षक — हर रिश्ते में गलत हुआ है; तो क्या लोग रिश्ते बनाना, पढ़ाना, बच्चे पैदा करना बंद कर दें? किसी के गंदे काम करने से कोई अपना काम थोड़ी छोड़ देगा। और आपने उन्हें खुद जांचा था क्या कि वे शुद्ध थे? जब तक आपको योग्यता से ज्यादा चाहिए और फ्री में चाहिए, आप ऐसे ही भटकते रहोगे और ऐसे लोग तैयार होते रहेंगे — कोई साधु-महात्मा आसमान से नहीं टपकता, वह इसी दुनिया का, आपके ही झुंड में से निकला एक आदमी है। अगर आप उसके पास जाकर मूल पर बात करते — निर्विकार होने के लिए, आत्मज्ञान के लिए — तब ऐसी घटनाएं नहीं होतीं; आप खुद कामनाओं में जाते हो। जब आप ₹1000 देकर लाख का आश्वासन लेने जाते हो, तो लुटोगे ही। इसके जिम्मेदार समाज है, और मैं भी समाज से अलग नहीं हूं। इसलिए तुलना मत करो, तुलना करोगे तो फंस जाओगे — आपको क्या करना है, वह देखो, करके निकल लो। जैसा जो करेगा, वैसा परिणाम खुद भोगेगा।

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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30