प्रश्नोत्तर P28-0049 · भाग 28
गुरु जी, भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है?
भाव — जब आप कुछ करते हो, करने में भाव बनता है। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में जैसी स्थिति रहती है वैसा भाव बनता है। जैसे आपके सामने भोजन आया, आपने कहा भोजन बहुत अच्छा बना है, खुश हो गए — राग हो गया। दूसरे दिन भोजन करते समय उसमें बाल आ गया, भाव बदल गया, द्वेष हो गया। जैसी घटना आपके सामने घटती है, वैसा आपका भाव बदलता रहता है। गुण — पहले यह बताओ, किसका गुण पूछ रहे हो? सबका अपना-अपना गुण है: कांटे का गुण है चुभना, तलवार का गुण है काटना, फूल का गुण है सुगंध देना। सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण — ये मानव शरीर के गुण हैं, मानव के नहीं, और जीव का अपना स्वभाव है। आम कच्चा है तो खट्टा, पक गया तो मीठा — आम वही है, पर गुण बदल गया। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में गुण भी बदलते हैं; आप कुछ फिक्स नहीं कर सकते, समझ के निकल सकते हो। लक्षण — सबके अपने-अपने लक्षण हैं; लक्षण मतलब रूप — गाल पर तिल है, सांवला है, गोरा है, लंबा है। लक्षण शरीर के होते हैं, बाहर से तय किए जाते हैं, लेकिन लक्षण टिकेंगे नहीं।
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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30