प्रश्नोत्तर P28-0050 · भाग 28
गुरु जी, धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं जिनमें पहला सत्य बोलना है — तो सत्य क्या है, और सच और सत्य में क्या भेद है?
सत्य बोला नहीं जा सकता, यहीं पे गलत हो गया। सत्य उसे कहा जाता है जो कभी बदलता नहीं। कोई पूछे फलाने यहां से गए, आप कहो हां गए — वो सच है, सत्य नहीं है; सच और झूठ हमेशा बदलते रहते हैं। ये पेड़ आप देख रहे हो, पहले नहीं था और बाद में नहीं रहेगा — तो ये ना सच है ना झूठ, इसका उपयोग करो और निकलो; इसी के लिए माया बोला गया। सत्कर्म और ईमानदारी कर्म में आते हैं, करने वाला बदल रहा है, इसे सत्य नहीं कह सकते — पर सत्कर्म, ईमानदारी करके वो सत्य तक पहुंचेगा। सत्य तो एक ही है, दो नहीं; वो कभी बोला नहीं जा सकता। ये सब सत्य तक पहुंचने का मार्ग है। ज्यादातर हम सच या झूठ को सिद्ध करने में लगे हैं — सिद्ध करने के चक्कर में पड़े तो भ्रष्ट हुए, क्योंकि यहां ना सच है ना झूठ। सुबह एक आदमी कहता है रास्ते में बड़ा गड्ढा है, शाम को दूसरा कहता है नहीं है — बीच में दोपहर को कोई तीसरा आकर गड्ढा पाट गया। एक तुम हो, एक सामने है जो तुम्हारे कर्म में निमित्त बन रहा है, और इन तीनों के पीछे एक और है जो तीनों नहीं जानते — उसको पकड़ो। उसको पकड़ते ही आप मुस्कुरा दोगे, तुरंत राग-द्वेष से मुक्त हो जाओगे: यार सब सही थे, हम ही गलत समझ लिए।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30