आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0053 · भाग 28

गुरु जी, अपनों की कुटिया आने का मन है — आप आदेश दें तो आऊं।

मैंने तो विश्व में सबको बोल दिया है कि जिस किसी साधक को रहने की या कोई भी तकलीफ है, कोई प्रश्न-उत्तर है, और वो अपने आत्मिक कल्याण के लिए साधना करना चाहता है, तो ये व्यवस्था उसी के लिए तैयार की जा रही है। हमारे आदेश की अब जरूरत ही नहीं है। ये मेरी कुटिया थोड़ी ना है, ये कुटिया अपनों की है — तो आदेश देने वाला मैं कौन हूं? आप अधिकार से यहां आकर अपनों की तरह रह सकते हैं; अपनों की कुटिया में जितना सिस्टम बनाया गया है, उस सिस्टम में आप स्वतंत्रता से रह सकते हैं।

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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30