आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0065 · भाग 28

गुरु जी, तो क्या हमें ऐसा मानना चाहिए कि गुरु के पास रहकर ज्यादा साधना करनी चाहिए?

इसके अलावा यह देखना है कि गुरु का मेरे प्रति क्या आदेश है। जब गुरु के पास रहोगे तो गुरु आपकी स्थिति को देखकर आपको आदेश देगा कि आपको क्या करना है — मुझे बस गुरु के शब्दों का इंतजार करना है, और अगर मुझे लगता है तो अपनी बात रख देनी है कि मैं क्या करूं। गुरु यह देखेगा कि तुम्हारे अंदर काबिलियत क्या है — पूरी साधना की, सेवा के साथ साधना की, या सेवा की — और क्या करके तुम्हारा उद्धार होगा, वो मार्ग बता देगा; फिर बस उसी में लग जाना है। अगर उसने कह दिया पौधों को पानी दे, तो मेरा काम है वृक्ष बनने तक पौधों की देखरेख करना — वही मेरी साधना है, वही मेरी तपस्या है। पहले कुछ दिन जाकर रहो, अपने प्रश्नों को रखो, फिर पूछो कि मेरे लायक सेवा क्या है। वो घर भी भेज सकता है — वो देखेगा कि आपकी जरूरत कहां है, आप घर की जिम्मेदारी निभा के आए हो या नहीं; जैसे ज्ञानेश्वर के पिता को उनके गुरु ने घर भेज दिया था। बुद्ध ने बहुत शिष्यों को उपलब्धि के बाद कहीं भेज दिया, किसी को साधना बता दी, और आनंद को अपने पास ही रखा। गुरु सबकी स्थिति देखता है; वो जाते ही आदेश नहीं देगा, वो तो आप ही के लिए कर रहा है।

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