आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P28-0064 · भाग 28

गुरु जी, हम गुरु में भी तो फंस सकते हैं?

अगर मान लीजिए तुम गुरु में फंस गए, तो गुरु तो मुक्ति का द्वार है, वहां से तो आखिर निकल ही जाओगे। जैसे आनंद ने लगभग 40 वर्षों बाद बुद्ध से पूछा कि मुझे अभी तक ज्ञान क्यों नहीं हुआ, तो बोले — तुम सबसे मुक्त होकर मुझ में फंस गए। आनंद रात-दिन बुद्ध के साथ ही रहते थे, उनके स्नेह, प्रेम, लगाव में फंसे थे; लेकिन जैसे ही बुद्ध का शरीर छूटा, आनंद को उपलब्धि हो गई, क्योंकि बुद्ध मुक्त पुरुष थे और उन्होंने उनको ज्ञान दिया था। तो अगर तुम गुरु में भी फंसते हो, वो मुक्ति का द्वार है — तुम आखिरी जगह आकर खड़े हो गए।

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