प्रश्नोत्तर P28-0086 · भाग 28
गुरु जी, मुझे कोई निराशा-हताशा नहीं है, सिर्फ ईश्वर को पाना है।
ठीक है, आप एक बार अपने आप से पूछो — क्या मैं ईश्वर के लायक हूं? क्या मैंने अपने आप को इतना पवित्र कर लिया है कि वह मुझे मिले और मैं उसे गले लगाऊं? ऐसा तो नहीं कि मेरी पवित्रता से वह अपवित्र हो जाए? एकांत में बैठिए और चिंतन करिए — क्या सच में मुझे वही चाहिए, उसके पीछे और आगे कुछ भी नहीं चाहिए? क्या इस संसार में मेरा कुछ भी नहीं रहा, मुझे "मैं" भी नहीं चाहिए? क्या मैं उसके लिए अपने बनाए हुए अस्तित्व को, अपने वजूद को मिटाने के लिए पूरी तरह तैयार हूं — कि गले लगाकर दो से एक हो जाऊं और मेरा मिटना हो जाए, क्या मैं बर्दाश्त कर पाऊंगा? क्या पक्का हो गया कि इस दुनिया में ना कोई मेरा इंतजार कर रहा है, ना मैं किसी का, और मैं बस उसी के इंतजार में चुपचाप, खामोशी में बैठ गया हूं — कुछ नहीं चाहिए, ना आगे ना पीछे? जरा अपने आप से पूछो, क्या ऐसी स्थिति है।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31