प्रश्नोत्तर P28-0087 · भाग 28
गुरु जी, "कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा" — इसका क्या अर्थ है?
बातें बस समझने के लिए हैं। कलयुग केवल नाम आधारा — तो नाम के अलावा कुछ और जपना भी नहीं है, कोई और कर्म ही नहीं करना है, तब कुछ हो सकता है। और पता चला एक माला, दो माला, 11, 21, 108 माला जप लिया, और दिन भर आपने क्या किया — वो मायने रखता है। नाम के अलावा अगर आप जीवन में कुछ नहीं कर रहे हो तो सब कुछ हो सकता है; और नाम के बाद और कुछ कर रहे हो तो कुछ नहीं होने वाला। नाम के साथ उसका चरित्र भी अपनाना पड़ेगा, तब कुछ हो सकता है। भ्रम में मत जियो — जरा टटोलो कि क्या कहा गया है।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31