प्रश्नोत्तर P28-0143 · भाग 28
गुरु जी, चाणक्य ने कहा कि अभिमान परमात्मा तक पहुंचने के लिए होना चाहिए — क्या यह सही है?
अभिमान परमात्मा तक पहुंचने के लिए नहीं होना चाहिए। गर्व, अभिमान और स्वाभिमान में फर्क है। अभिमान का मतलब होता है "मैं कुछ हूं", और स्वाभिमान का मतलब होता है अपनी आत्मरक्षा करना — ना गिरना, ना किसी को गिराना। और गर्व का मतलब — मैं कुछ कर रहा हूं, मेरे द्वारा वह कार्य हो रहा है और समाज के लोग उसका सदुपयोग कर रहे हैं, इस पर गर्व करना। अभिमान का मतलब — मैं कुछ हूं, मेरे जैसा कोई नहीं, मैं सबसे ताकतवर। अभिमान बाधक है, गर्व नहीं। गर्व तो आप काम के बाद करोगे; अभिमान में तो आप अपने आप को बनाए रखना चाहते हो। गर्व तो कुछ करके होता है, तो गर्व होना ठीक है।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31