प्रश्नोत्तर P28-0153 · भाग 28
गुरु जी, सत्संग को बिना सुने जब अकेले यात्रा में बढ़ते हैं तो धीरे-धीरे भटकने क्यों लगते हैं?
तो सत्संग सुनते रहो — पहुंचे नहीं हो ना, पहुंचने तक। देखिए, आप अगर किसी मार्ग पर जा रहे हो, आपके पास पता तो है लेकिन पूरे रास्ते तो लिखे नहीं गए हैं। तो जैसे-जैसे आगे जाओगे, कहीं भटको तो किसी से पूछ लो। जब तक लक्ष्य तक नहीं पहुंचो, तब तक भटकने का भय बना रहेगा। इसलिए सत्संग सुनते रहो, आगे बढ़ते रहो।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31