प्रश्नोत्तर P28-0155 · भाग 28
गुरु जी, संत लोग जब कहते हैं कि हमारे अंदर ही ब्रह्मांड है, इसका मतलब क्या है — गहरे आत्मध्यान से अपनी चेतना को ब्रह्मांड से जोड़ना, या कुछ और?
देखिए, पंच महाभूत, पंच तत्व से शरीर बना है, पंच तत्व से ब्रह्मांड बना है। जैसे पानी है, उसमें से एक बूंद निकाल ली — एक बूंद का दायरा कम है, लेकिन जो तत्व पूरे पानी में है वही उसमें है। कहने का मतलब है — यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे, यथा ब्रह्मांडे तथा पिंडे। तो स्वयं को साधना है — एक ही साधे सब सधे; एक कौन? स्वयं। अपने आप को साधना है और आगे बढ़ जाना है।
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वीडियो: आत्मज्ञान तक पहुंचने वालों के लिए ध्यान रखने वाली विशेष ज्ञान / #आत्मज्ञान #satsang · 2024-08-31