प्रश्नोत्तर P28-0192 · भाग 28
गुरु जी, गुरु की अवधारणा और व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द अनेक परंपराएं और विश्वास बन गए हैं। क्या गुरु के ज्ञान और आचरण के अतिरिक्त भी कोई महत्व, जैसे कृपा इत्यादि, होता है?
आपके कर्म से कृपा होती है। आपको ना कोई श्राप दे सकता है, ना कृपा कर सकता है, ना आशीर्वाद दे सकता है। कृपा तब होती है जब आप परोपकार करते हो। कृपा फल की तरह होती है — खा भी सकते हो, लगा भी सकते हो। जब आप किसी के साथ अच्छा व्यवहार करते हो, सेवा करते हो, तो आशीर्वाद मिलता है; यह अनाज की तरह होता है। और अगर आप किसी को सताते हो तो बद्दुआ मिलती है, और यह आपको बहुत नीचे ले जाती है। कोई आपके साथ गंदा व्यवहार करे तो आप कितना भी आशीर्वाद दीजिए, नहीं लगेगा। कई दिन से भूख लगी थी और किसी ने भोजन करा दिया, तो रोम-रोम से आशीर्वाद निकलेगा। कहने का मतलब है — आपका कर्म आपको आशीर्वाद या श्राप दिलाता है; देने के लिए कोई न कोई तन में आता है, प्रकृति दिलवा देती है।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21